नेचरडीप के बारे में जानिए


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मायकोरायझा ही एक उपयुक्त बुरशी आहे . मायकोरायझा पिकाच्या मुळांवर व मुळांमध्ये वाढते . ती झाडांच्या विस्तारीत पांढ-या मुळांसारखे काम करते . त्यामुळे द्राक्ष व फळपिकांस अधिक क्षेत्रातून पाणी व अन्नद्रव्ये उपलब्ध होतात . स्फुरद , पालाश , नत्र , कॅल्शियम , सोडियम , जस्त व तांबे यांसारखी अन्नद्रव्ये जमिनीतून शोषून घेण्यास मायकोरायझा पिकांना मदत करतात . फळझाडे व भाजीपाला पिकांना मायकोरायझा उपयुक्त आहे . मायकोरायझा जैविक खतांच्या वापराने उत्पादनात २२ ते २५ टक्के वाढ आढळून आली आहे.

यासाठी सुमिटोमो केमिकल इंडिया लिमिटेड कंपनीचे अमेरीकन मायकोरायझा नेचर डीप200 ग्रॅम प्रति एकर साठी याप्रमाणे ड्रिपने किवा आळवनी योग्य प्रकारे द्यावे.

नेचरडीप के बारे में किसानों के अनुभव


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नेचरडीप के साथ केले की खेती से मिलेगी ज्यादा उपज, जानिए कैसे ?


केला भारत वर्ष का प्राचीनतम स्वादिष्ट पौष्टिक पाचक एवं लोकप्रीय फल है अपने देश में प्राय:हर गाँव में केले के पेड़ पाए जाते है इसमे शर्करा एवं खनिज लवण जैसे कैल्सियम तथा फास्फोरस प्रचुर मात्रा में पाए जाता है। फलों का उपयोग पकने पर खाने हेतु कच्चा सब्जी बनाने के आलावा आटा बनाने तथा चिप्स बनाने के कम आते है। इसकी खेती लगभग पूरे भारत वर्ष में की जाती है।

जलवायु एवं भूमि

केला की खेती के लिए किस प्रकार की जलवायु एवं भूमि की आवश्यकता होती है? : गर्मतर एवं सम जलवायु केला की खेती के लिए उत्तम होती है अधिक वर्षा वाले क्षेत्रो में केला की खेती सफल रहती है जीवांश युक्त दोमट एवम मटियार दोमट भूमि ,जिससे जल निकास उत्तम हो उपयुक्त मानी जाती है भूमि का पी एच मान 6-7.5 तक इसकी खेती के लिए उपयुक्त होता है।

प्रजातियाँ

कौन कौन सी प्रजातियाँ है जिनका इस्तेमाल हम केले की खेती करते वक्त करे? : उन्नतशील प्रजातियाँ केले की दो प्रकार की पाई जाती है फल खाने वाली किस्स्मो में गूदा मुलायम, मीठा तथा स्टार्च रहित सुवासित होता है जैसे कि बसराई,ड्वार्फ ,हरी छाल,सालभोग,अल्पान,रोवस्ट तथा पुवन इत्यादि प्रजातियाँ है दूसरा है सब्जी बनाने वाली इन किस्मों में गुदा कडा स्टार्च युक्त तथा फल मोटे होते है जैसे कोठिया,बत्तीसा, मुनथन एवं कैम्पिरगंज है।

खेती की तैयारी

खेत की तैयारी कैसी होनी चाहिए व किस प्रकार करें? : खेत की तैयारी समतल खेत को 4-5 गहरी जुताई करके भुर भूरा बना लेना चाहिए उत्तर प्रदेश में मई माह में खेत की तैयारी कर लेनी चाहिए इसके बाद समतल खेत में लाइनों में गढढे तैयार करके रोपाई की जाती है।

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